भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता बनकर उभर रहा है। केपीएमजी (KPMG) के 'ग्लोबल टेक्नॉलजी इंडस्ट्री इनोवेशन सर्वे' के अनुसार, भारत ने अत्याधुनिक तकनीकों के विकास में अभूतपूर्व तत्परता दिखाई है।
भारत की प्रमुख उपलब्धियां: एक नजर में
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वैश्विक रैंकिंग: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML), ब्लॉकचेन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसे क्षेत्रों में भारत, चीन के साथ संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।
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शीर्ष नेतृत्व: इस सूची में अमेरिका अभी भी पहले पायदान पर बना हुआ है।
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बंगलुरु का दबदबा: दुनिया के टॉप-10 तकनीकी केंद्रों (Tech Hubs) में भारत की सिलिकन वैली, बंगलुरु 09 वें स्थान पर काबिज हो गई है।
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उभरता केंद्र: वैश्विक विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य का सबसे बड़ा इनोवेशन हब अब अमेरिका की सिलिकन वैली से बाहर होगा, जिसमें सिंगापुर (वर्तमान में प्रथम स्थान) सबसे सशक्त दावेदार है।
भारत की सफलता के पीछे के मुख्य कारक
सर्वेक्षण में भारत की इस तीव्र प्रगति के लिए निम्नलिखित बिंदुओं को उत्तरदायी माना गया है:
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पूंजी और शहरीकरण: देश में निवेश का बढ़ता प्रवाह और तेजी से होते शहरीकरण ने अनुसंधान के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है।
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डेमोग्राफिक डिविडेंड: भारत की विशाल युवा आबादी नवाचार और नई खोजों के लिए एक मजबूत आधार प्रदान कर रही है।
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वीजा नीतियों का प्रभाव: अमेरिका की कठोर वीजा नीतियों के कारण कई कुशल विशेषज्ञ या तो स्वदेश लौट आए या उन्होंने भारत में रहकर ही काम करने को प्राथमिकता दी, जिससे घरेलू स्तर पर प्रतिभा पूल (Talent Pool) मजबूत हुआ।
सरकारी पहल और भविष्य की राह
केंद्र सरकार भविष्य की चुनौतियों को भांपते हुए डिजिटल बुनियादी ढांचे पर विशेष जोर दे रही है। इसी विजन के तहत कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही हैं:
डिजिटल इंडिया: देश के कोने-कोने तक तकनीक की पहुंच।
TIDE 2.0: उद्यमियों के तकनीकी ऊष्मायन और विकास को बढ़ावा देना।
सेंटर ऑफ एक्सलेंस (CoE) और डेटा पार्क: अत्याधुनिक शोध और डेटा स्टोरेज के लिए समर्पित केंद्रों की स्थापना।







