नई दिल्ली: भारत की सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं एक बार फिर वैश्विक चर्चा का विषय बन गई हैं। एक अमेरिकी महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उसने दावा किया है कि जिस दवा के लिए उसे अमेरिका में लगभग 1,000 डॉलर (करीब ₹95,000) चुकाने पड़ते, वही दवा उसे भारत से केवल 25 डॉलर (करीब ₹2,300) में प्राप्त हुई।
विक्टोरिया नामक महिला ने अपने वीडियो में बताया कि उसकी स्वास्थ्य बीमा कंपनी ने दवा का खर्च वहन करने से इनकार कर दिया था। ऐसे में उसे अमेरिका में मात्र छह गोलियों के लिए लगभग 1,000 डॉलर खर्च करने पड़ते। बाद में उसके डॉक्टर ने उसे भारतीय निर्माता से दवा मंगाने की सलाह दी, जिसके बाद उसे वही दवा मात्र 10 डॉलर में मिली, जबकि 15 डॉलर शिपिंग पर खर्च हुए। कुल मिलाकर दवा की कीमत सिर्फ 25 डॉलर रही।
इस अनुभव के बाद महिला ने अमेरिकी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब वही दवा भारत से इतनी कम कीमत पर उपलब्ध हो सकती है, तो अमेरिका में मरीजों से इतनी अधिक राशि क्यों वसूली जाती है। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम और दवाओं की कीमतों को लेकर बहस छिड़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कम लागत, आधुनिक अस्पताल, प्रशिक्षित चिकित्सक और कम प्रतीक्षा अवधि के कारण भारत मेडिकल टूरिज्म का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। यही वजह है कि ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, यूरोप और मध्य-पूर्व के हजारों मरीज हर वर्ष उपचार के लिए भारत का रुख कर रहे हैं।
हाल के वर्षों में भारत ने रोबोटिक सर्जरी और टेलीमेडिसिन (दूरस्थ चिकित्सा) के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। भारतीय डॉक्टरों द्वारा हजारों किलोमीटर दूर बैठे मरीजों का सफलतापूर्वक ऑपरेशन किए जाने जैसी उपलब्धियों ने देश की चिकित्सा क्षमता को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में कम लागत पर उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होने के कारण मेडिकल टूरिज्म उद्योग लगातार विस्तार कर रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल यह वीडियो भी भारतीय स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल टूरिज्म सेक्टर की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है, जहां अपेक्षाकृत कम लागत में गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।










