नई दिल्ली/गुवाहाटी। पूर्वोत्तर भारत में मानसून की तेज़ बारिश ने कई राज्यों में हालात गंभीर बना दिए हैं। असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, सिक्किम, मणिपुर, नागालैंड और मिजोरम के कई जिलों में लगातार बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं। कई इलाकों में बाढ़, भूस्खलन और जलभराव से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। सड़कें क्षतिग्रस्त होने और पुलों को नुकसान पहुंचने से अनेक गांवों का संपर्क टूट गया है, जबकि प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों में जुटा हुआ है।
सबसे अधिक प्रभाव असम में देखने को मिल रहा है। राज्य के कई जिलों में ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के आसपास या उससे ऊपर पहुंच गया है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, हाल के दिनों में बाढ़ से हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। विशेष रूप से धेमाजी जिले के कई गांव जलमग्न हो गए हैं और बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों तथा राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। खेतों में पानी भरने से धान और अन्य खरीफ फसलों को भी नुकसान पहुंचा है।
अरुणाचल प्रदेश में लगातार बारिश के कारण भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं। कई राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर मलबा आने से यातायात बाधित हुआ है। पहाड़ी जिलों में सड़क संपर्क टूटने से राहत सामग्री पहुंचाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन मशीनों की मदद से मार्गों को जल्द से जल्द खोलने का प्रयास कर रहा है।
मेघालय में भी भारी वर्षा का असर साफ दिखाई दे रहा है। शिलांग सहित कई क्षेत्रों में जलभराव और पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन की घटनाएं दर्ज की गई हैं। कुछ स्थानों पर बिजली आपूर्ति और संचार सेवाएं भी अस्थायी रूप से प्रभावित हुई हैं। मौसम विभाग ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
सिक्किम और मणिपुर में भी तेज बारिश के कारण कई सड़कें बंद हो गई हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन से आवाजाही प्रभावित हुई है, जबकि कुछ इलाकों में नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। स्थानीय प्रशासन लगातार हालात की निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
इस बीच केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास एवं संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू, सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग तथा मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह से टेलीफोन पर बातचीत कर बाढ़ और बारिश से उत्पन्न स्थिति की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने राहत, बचाव और पुनर्वास कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार प्रभावित राज्यों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
राज्यों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), सेना तथा स्थानीय प्रशासन की टीमें संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। कई स्थानों पर नावों के माध्यम से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। राहत शिविरों में भोजन, पेयजल, चिकित्सा सुविधाएं और आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों की मरम्मत का कार्य भी युद्धस्तर पर जारी है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पूर्वोत्तर के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना जताई है। इसे देखते हुए राज्य सरकारों ने जिला प्रशासन को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। नदी किनारे रहने वाले लोगों, पहाड़ी ढलानों के आसपास बसे परिवारों तथा संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक बारिश का यही सिलसिला जारी रहा तो निचले इलाकों में बाढ़ और पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन की स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय, त्वरित राहत कार्य और समय पर पुनर्वास अभियान लाखों प्रभावित लोगों के लिए राहत पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।






