भारत की समुद्री सुरक्षा को बड़ी मजबूती देते हुए अत्याधुनिक स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट INS महेंद्रगिरि (F38) को भारतीय नौसेना में औपचारिक रूप से शामिल कर लिया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम नौसैनिक अड्डे पर आयोजित समारोह में इस युद्धपोत को नौसेना को समर्पित किया। यह युद्धपोत Project 17A (Nilgiri Class Stealth Frigates) के तहत शामिल होने वाला छठा स्टेल्थ फ्रिगेट है और इसे भारत की समुद्री शक्ति तथा 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि INS महेंद्रगिरि केवल एक युद्धपोत नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता, स्वदेशी रक्षा निर्माण और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की मजबूत होती रणनीतिक उपस्थिति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह युद्धपोत भारतीय नौसेना की ब्लू वॉटर नेवीबनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
क्या है Project 17A?
Project 17A भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट निर्माण कार्यक्रम है। यह पहले के Project 17 (शिवालिक क्लास) का उन्नत संस्करण है। इस परियोजना के अंतर्गत कुल 7 आधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं, जिनका डिजाइन भारतीय नौसेना के Warship Design Bureau ने तैयार किया है।
इन युद्धपोतों का निर्माण दो प्रमुख भारतीय शिपयार्डों—Mazagon Dock Shipbuilders Limited (MDL), मुंबई और Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE), कोलकाता—द्वारा किया जा रहा है। INS महेंद्रगिरि का निर्माण MDL ने किया है। Project 17A के अंतर्गत अब तक INS Nilgiri, INS Udaygiri, INS Himgiri, INS Taragiri, INS Dunagiri और INS Mahendragiri नौसेना के बेड़े का हिस्सा बन चुके हैं, जबकि अंतिम जहाज INS Vindhyagiri भी शीघ्र शामिल होगा।
परियोजना का इतिहास
Project 17A को भारतीय नौसेना के पुराने स्टेल्थ फ्रिगेट कार्यक्रम को और अधिक आधुनिक बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। परियोजना के तहत ऐसे युद्धपोत विकसित किए गए हैं जिनमें कम रडार पहचान (Low Radar Signature), आधुनिक हथियार, अत्याधुनिक सेंसर और उच्च स्तर की स्वचालन (Automation) क्षमता मौजूद है।
INS महेंद्रगिरि का कील (Keel) 28 जून 2022 को रखा गया था और इसे 1 सितंबर 2023 को लॉन्च किया गया। समुद्री परीक्षण और विभिन्न तकनीकी परीक्षण पूरे होने के बाद इसे वर्ष 2026 में भारतीय नौसेना को सौंपा गया और अब औपचारिक रूप से सेवा में शामिल कर लिया गया है।
क्या हैं INS महेंद्रगिरि की प्रमुख विशेषताएं?
लगभग 149 मीटर लंबा और करीब 6,670 टन विस्थापन वाला INS महेंद्रगिरि आधुनिक नौसैनिक युद्ध की सभी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें लगभग 75 प्रतिशत स्वदेशी उपकरण और प्रणालियां लगी हैं, जो भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता को दर्शाती हैं।
युद्धपोत में आधुनिक स्टेल्थ तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे दुश्मन के रडार पर इसकी पहचान बेहद कठिन हो जाती है। इसके अलावा इसमें अत्याधुनिक रडार, सोनार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, मिसाइल लॉन्चर और मल्टी-रोल कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगाए गए हैं। यह जहाज हवा, समुद्र और पानी के भीतर मौजूद खतरों का एक साथ मुकाबला करने में सक्षम है।
INS महेंद्रगिरि क्या-क्या कर सकता है?
यह युद्धपोत कई प्रकार के सैन्य अभियानों के लिए तैयार किया गया है। इसके प्रमुख कार्यों में शामिल हैं—
- दुश्मन के युद्धपोतों को नष्ट करना।
- पनडुब्बियों का पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करना।
- हवाई हमलों से बेड़े की सुरक्षा करना।
- लंबी दूरी तक समुद्री निगरानी और गश्त।
- समुद्री डकैती और आतंकवाद विरोधी अभियान।
- मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) अभियान।
- हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को मजबूत करना।
आत्मनिर्भर भारत को मिला नया बल
INS महेंद्रगिरि की सबसे बड़ी विशेषता इसका उच्च स्वदेशीकरण है। इसमें लगे अधिकांश हथियार, सेंसर और प्रणालियां भारत में विकसित या निर्मित हैं। इससे न केवल विदेशी रक्षा आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग, निजी कंपनियों और एमएसएमई क्षेत्र को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
NDD विश्लेषण
INS महेंद्रगिरि का नौसेना में शामिल होना केवल एक नए युद्धपोत का बेड़े में जुड़ना नहीं है, बल्कि यह भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति, स्वदेशी रक्षा तकनीक और हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक प्रभाव का स्पष्ट संकेत है। Project 17A के माध्यम से भारत आधुनिक, आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सक्षम नौसेना के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में यह युद्धपोत भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।








