उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन के साथ-साथ चारधाम यात्रा को भी प्रभावित कर दिया है। राज्य के कई पर्वतीय जिलों में तेज बारिश, भूस्खलन और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण प्रशासन हाई अलर्ट पर है। मौसम विभाग (IMD) ने रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, देहरादून और टिहरी समेत कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है। लोगों और यात्रियों से अनावश्यक यात्रा से बचने तथा प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की गई है।
मसूरी स्थित प्रसिद्ध कैंपटी फॉल में भारी बारिश के बाद जलप्रवाह अचानक तेज हो गया, जिससे झरने के आसपास खतरे की स्थिति बन गई। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पर्यटकों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है। वहीं देहरादून में बारिश के कारण एक दीवार ढहने की घटना में एक महिला घायल हो गई। कई निचले इलाकों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने की भी खबरें सामने आई हैं।
बारिश का सबसे अधिक असर चारधाम यात्रा पर देखने को मिल रहा है। उत्तरकाशी जिले में भूस्खलन के कारण यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग के कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे करीब 100 यात्री कुछ समय के लिए मार्ग में फंस गए। हालांकि राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीमों ने राहत एवं बचाव अभियान चलाकर सभी यात्रियों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया।
लगातार हो रही बारिश के कारण राज्यभर में लगभग 120 सड़कें, जिनमें तीन राष्ट्रीय राजमार्ग भी शामिल हैं, अस्थायी रूप से बंद हो गई हैं। कई स्थानों पर मलबा हटाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। लोक निर्माण विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की टीमें जेसीबी मशीनों की सहायता से मार्गों को खोलने में जुटी हुई हैं। प्रशासन का कहना है कि मौसम सामान्य होने के बाद ही यातायात पूरी तरह बहाल किया जा सकेगा।
चारधाम यात्रा मार्गों पर भी मौसम का असर साफ दिखाई दे रहा है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार ऋषिकेश से रुद्रप्रयाग, रुद्रप्रयाग से केदारनाथ, जोशीमठ से बदरीनाथ तथा उत्तरकाशी से गंगोत्री मार्ग पर हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक की संभावना बनी हुई है। यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी गई है।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों तक उत्तराखंड में मानसून सक्रिय रहेगा और कई जिलों में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके चलते भूस्खलन, अचानक बाढ़ और चट्टानें गिरने जैसी घटनाओं की आशंका बनी हुई है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में राहत एवं बचाव दलों को तैनात कर दिया है और जिला अधिकारियों को 24 घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
राज्य सरकार ने चारधाम यात्रियों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचना के आधार पर ही यात्रा करें। मौसम खराब होने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर रुकें और अफवाहों पर ध्यान न दें। आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ और हेल्पलाइन नंबरों से तत्काल संपर्क करने की सलाह दी गई है।
उत्तराखंड में सक्रिय मानसून ने एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों की संवेदनशीलता को उजागर किया है। चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु राज्य में मौजूद हैं, ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनियों और प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करना बेहद आवश्यक है। मौसम सामान्य होने तक यात्रा में सतर्कता ही सबसे बड़ा सुरक्षा उपाय है।










