भारत ने आज एक नया इतिहास रच दिया है। एनडीए (NDA) की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू देश की 15वीं राष्ट्रपति चुनी गई हैं। इसके साथ ही वह देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचने वाली पहली आदिवासी महिला और दूसरी महिला राष्ट्रपति बन गई हैं। गुरुवार को हुई वोटों की गिनती में मुर्मू ने भारी अंतर से जीत हासिल की, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद उनके आवास पर जाकर उन्हें बधाई दी।वोटों की गिनती के तीसरे दौर के बाद ही मुर्मू ने जीत के लिए जरूरी 50% से अधिक मतों का कोटा हासिल कर लिया था। उन्हें कुल 6,76,803 मूल्य के वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी यशवंत सिन्हा को 3,80,177 मूल्य के वोट प्राप्त हुए। दिलचस्प बात यह रही कि कई विपक्षी दलों के सांसदों और विधायकों ने भी अपनी पार्टी लाइन से हटकर मुर्मू के पक्ष में 'क्रॉस वोटिंग' की, जिससे उनकी जीत का अंतर और बढ़ गया।
ओडिशा के एक बेहद साधारण संथाली आदिवासी परिवार में जन्मी द्रौपदी मुर्मू का जीवन संघर्षों और सादगी की मिसाल रहा है। एक पार्षद से अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाली मुर्मू झारखंड की पहली महिला राज्यपाल भी रह चुकी हैं। उनकी इस जीत को भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ एक आदिवासी समाज की बेटी अब राष्ट्रपति भवन से दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का नेतृत्व करेंगी।जीत की खबर मिलते ही मुर्मू के पैतृक गांव रायरंगपुर में मिठाइयां बांटी गईं और आदिवासी लोक नृत्य के साथ जश्न मनाया गया। पीएम मोदी ने ट्वीट किया, "भारत ने इतिहास रच दिया है। एक ऐसी बेटी जो देश के दूरदराज के इलाके में पैदा हुई, आज हमारी राष्ट्रपति है। उनका जीवन और संघर्ष हर भारतीय को प्रेरित करता है।" यशवंत सिन्हा ने भी अपनी हार स्वीकार करते हुए मुर्मू को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।










