स्टॉकहोम/नई दिल्ली:
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की वर्ष 2026 रिपोर्ट ने वैश्विक सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है जहां परमाणु हथियारों की संख्या और उनकी रणनीतिक भूमिका दोनों बढ़ रही हैं। अधिकांश परमाणु संपन्न देश अपने हथियारों का आधुनिकीकरण कर रहे हैं और नई मिसाइल प्रणालियां विकसित कर रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2026 तक दुनिया में अनुमानित 12,187 परमाणु हथियार (न्यूक्लियर वॉरहेड्स) मौजूद थे। इनमें से लगभग 9,745 हथियार सैन्य भंडार में संभावित उपयोग के लिए रखे गए हैं, जबकि करीब 4,012 हथियार मिसाइलों और विमानों पर तैनात हैं। लगभग 2,100 से 2,200 वॉरहेड्स उच्च सतर्कता (High Alert) की स्थिति में रखे गए हैं।
SIPRI की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2026 तक रूस दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु शक्ति संपन्न देश बना हुआ है, जिसके पास अनुमानित 5,459 परमाणु वॉरहेड्स हैं। इसके बाद अमेरिका का स्थान है, जिसके पास लगभग 5,177 वॉरहेड्स मौजूद हैं। ये दोनों देश मिलकर दुनिया के अधिकांश परमाणु हथियारों पर नियंत्रण रखते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक चीन के पास करीब 620 परमाणु वॉरहेड्स हैं और वह सबसे तेज़ गति से अपना परमाणु भंडार बढ़ाने वाला देश बनकर उभरा है। वहीं फ्रांस के पास लगभग 290 और ब्रिटेन के पास करीब 225 परमाणु हथियार हैं।
दक्षिण एशिया की बात करें तो भारत के पास अनुमानित 190 परमाणु वॉरहेड्स हैं, जबकि पाकिस्तान के पास करीब 170 वॉरहेड्स मौजूद हैं। SIPRI के अनुसार दोनों देश अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों का आधुनिकीकरण जारी रखे हुए हैं।
इसके अलावा इज़राइल के पास अनुमानित 90 परमाणु हथियार हैं, हालांकि उसने आधिकारिक रूप से अपने परमाणु कार्यक्रम की पुष्टि नहीं की है। वहीं उत्तर कोरिया के पास लगभग 60 परमाणु वॉरहेड्स होने का अनुमान लगाया गया है और उसका परमाणु कार्यक्रम लगातार विस्तार की ओर बढ़ रहा है।
SIPRI का कहना है कि दुनिया की लगभग सभी परमाणु शक्तियां अपने हथियारों और डिलीवरी सिस्टम को आधुनिक बनाने में जुटी हैं, जिससे भविष्य में वैश्विक सुरक्षा चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।










