भारतीय रेलवे ने स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन प्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन सेल आधारित ट्रेन का सफल हाई-स्पीड ट्रायल पूरा कर लिया है। शुक्रवार को हरियाणा के जींद-सोनीपत रेलमार्ग पर किए गए अंतिम स्पीड ट्रायल में ट्रेन ने 120 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति प्राप्त की। यह ट्रायल दिल्ली मंडल के अंतर्गत आने वाले नॉर्दर्न रेलवे सेक्शन पर किया गया, जिसे भविष्य में नियमित परिचालन के लिए तैयार किया जा रहा है।
यह उपलब्धि भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल करती है, जिन्होंने हाइड्रोजन आधारित रेल तकनीक को अपनाने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए हैं। इससे पहले जर्मनी, जापान, चीन, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन या परीक्षण किया जा चुका है।
120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार
ट्रायल के दौरान ट्रेन ने 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार हासिल की। अधिकारियों के अनुसार परीक्षण के दौरान ट्रेन के ब्रेकिंग सिस्टम, त्वरण (Acceleration), ईंधन सेल की कार्यक्षमता, सुरक्षा मानकों और संपूर्ण परिचालन क्षमता का मूल्यांकन किया गया। प्रारंभिक रिपोर्ट में सभी प्रमुख प्रणालियों का प्रदर्शन संतोषजनक पाया गया है।
दिल्ली-हरियाणा रेल कॉरिडोर के लिए बड़ी उपलब्धि
ट्रायल हरियाणा के जींद से सोनीपत तक लगभग 89 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर किया गया। यह रेलमार्ग राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से जुड़ा हुआ है और भविष्य में हाइड्रोजन ट्रेन के नियमित संचालन का पहला मार्ग बन सकता है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि यह परियोजना दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
पूरी तरह प्रदूषण मुक्त तकनीक
हाइड्रोजन ट्रेन की सबसे बड़ी विशेषता इसका शून्य कार्बन उत्सर्जन (Zero Emission) है। इसमें डीजल इंजन की जगह हाइड्रोजन फ्यूल सेल का उपयोग किया जाता है। फ्यूल सेल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली उत्पन्न होती है, जिससे ट्रेन संचालित होती है। इस प्रक्रिया का एकमात्र उप-उत्पाद जलवाष्प (Water Vapour) होता है, जिससे पर्यावरण को कोई हानिकारक प्रदूषण नहीं होता।
स्वदेशी तकनीक पर आधारित परियोजना
भारतीय रेलवे ने इस ट्रेन का विकास 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत स्वदेशी तकनीक के साथ किया है। ट्रेन में दो पावर कार और आठ यात्री कोच लगाए गए हैं। इसे आधुनिक यात्री सुविधाओं जैसे वातानुकूलित कोच, स्वचालित दरवाजे, डिजिटल सूचना प्रणाली और उन्नत सुरक्षा उपकरणों से लैस किया गया है।
ग्रीन रेलवे मिशन को मिलेगा बल
भारतीय रेलवे आने वाले वर्षों में कार्बन उत्सर्जन कम करने और नेट-जीरो लक्ष्य हासिल करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। रेलवे पहले ही विद्युतीकरण, सौर ऊर्जा और ऊर्जा दक्ष तकनीकों पर निवेश कर रहा है। हाइड्रोजन ट्रेन इस रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जिन रेलमार्गों पर पूर्ण विद्युतीकरण संभव नहीं है, वहां हाइड्रोजन ट्रेन डीजल इंजनों का प्रभावी विकल्प बन सकती है। इससे ईंधन आयात पर निर्भरता भी कम होगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
जल्द शुरू हो सकती है यात्री सेवा
रेलवे अधिकारियों के अनुसार सफल हाई-स्पीड ट्रायल के बाद अब आवश्यक तकनीकी एवं नियामकीय औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। सभी सुरक्षा स्वीकृतियां मिलने के बाद इस ट्रेन को नियमित यात्री सेवा में शामिल किया जाएगा। इससे देश में हरित परिवहन तकनीक का नया अध्याय शुरू होगा। भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का सफल परीक्षण केवल रेलवे की तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा आधारित भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है। यदि यह परियोजना सफलतापूर्वक व्यावसायिक संचालन में आती है, तो आने वाले वर्षों में भारतीय रेलवे के कई अन्य मार्गों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन शुरू किया जा सकता है। इससे प्रदूषण में कमी, ऊर्जा सुरक्षा और टिकाऊ परिवहन को नई गति मिलेगी।










