नई दिल्ली। भारत की आधिकारिक यात्रा पर आने से ठीक पहले जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने एक विशेष लेख लिखकर भारत-जापान संबंधों को नई दिशा देने का स्पष्ट संदेश दिया है। "Japan and India: Strategically Aligned Trusted Partnership" शीर्षक से प्रकाशित इस लेख में उन्होंने भारत को जापान का सबसे भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि साझा मूल्यों, लोकतांत्रिक परंपराओं और मुक्त एवं नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की सोच पर आधारित हैं।
प्रधानमंत्री ताकाइची ने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर उनकी भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देश वार्षिक शिखर सम्मेलन के साथ-साथ आपसी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत और जापान के शीर्ष नेताओं के बीच नियमित संवाद ने पिछले दो दशकों में दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई दी है।
लेख में उन्होंने उल्लेख किया कि वर्ष 2014 में दोनों देशों के संबंधों को 'विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी' (Special Strategic and Global Partnership) का दर्जा मिलने के बाद रक्षा, अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचा, निवेश, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
जापानी प्रधानमंत्री ने मुक्त एवं खुला इंडो-पैसिफिक (Free and Open Indo-Pacific-FOIP) की अवधारणा को दोनों देशों की साझा प्राथमिकता बताया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के उस दृष्टिकोण का उल्लेख किया, जिसमें हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को एक साझा रणनीतिक क्षेत्र के रूप में देखा गया था। उन्होंने लिखा कि भारत और जापान का उद्देश्य ऐसा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र बनाना है, जहां सभी देशों को बिना किसी दबाव के स्वतंत्र रूप से विकास का अवसर मिले।
प्रधानमंत्री ताकाइची ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'महासागर (MAHASAGAR)' पहल की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और आपसी सहयोग को मजबूत करने में भारत की यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और जापान इसके साथ मिलकर कार्य करना चाहता है।
आर्थिक सहयोग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जापान की आधिकारिक विकास सहायता (ODA) के माध्यम से भारत और आसपास के क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाएं विकसित की गई हैं। उन्होंने विशेष रूप से धुबरी-फुलबाड़ी पुल, क्षेत्रीय सड़क संपर्क और पूर्वोत्तर भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने वाली परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे क्षेत्रीय व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिलेगी।
लेख में प्रधानमंत्री ताकाइची ने स्पष्ट किया कि उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली वार्ता में आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), उभरती प्रौद्योगिकियां और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने जैसे विषय प्रमुख रहेंगे। उनका कहना है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत और जापान मिलकर विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों का भी विशेष उल्लेख किया। जापान के प्राचीन शहर नारा का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा कि वहां आज भी भारतीय बौद्ध संस्कृति की गहरी छाप दिखाई देती है। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध आज भी लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने का मजबूत आधार बने हुए हैं।
अपने लेख के अंत में जापानी प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि भारत और जापान की साझेदारी आने वाले वर्षों में और मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि दोनों लोकतांत्रिक देश एक "रणनीतिक रूप से समन्वित और भरोसेमंद साझेदार" के रूप में न केवल अपने नागरिकों की समृद्धि के लिए, बल्कि पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।
भारत-जापान शिखर वार्ता में कई महत्वपूर्ण समझौतों और नई सहयोगी पहलों की घोषणा होने की संभावना है, जिन पर दोनों देशों की निगाहें टिकी हुई हैं।










