नई दिल्ली: केंद्र सरकार की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) व्यवस्था ने देश में सरकारी लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, डीबीटी के माध्यम से अब तक ₹50 लाख करोड़ से अधिक की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जा चुकी है।
सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था ने बिचौलियों की भूमिका को काफी हद तक समाप्त किया है, जिससे योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंच रहा है। इसके साथ ही विभिन्न योजनाओं में होने वाली गड़बड़ियों और फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगने से ₹4.31 लाख करोड़ से अधिक की बचत भी हुई है।
डीबीटी प्रणाली के जरिए किसानों, महिलाओं, छात्रों, वरिष्ठ नागरिकों और अन्य लाभार्थियों को सरकारी सहायता सीधे बैंक खातों में उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार का कहना है कि इससे लाभ वितरण की प्रक्रिया तेज हुई है और पारदर्शिता में भी उल्लेखनीय सुधार आया है।
अंतरराष्ट्रीय संस्थानों ने भी भारत की डीबीटी व्यवस्था की सराहना की है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने में डिजिटल भुगतान और प्रत्यक्ष हस्तांतरण प्रणाली ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सरकार के अनुसार, डिजिटल इंडिया, जन धन खाते, आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी के संयोजन ने डीबीटी को देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक सुधार पहलों में से एक बना दिया है।










