वॉशिंगटन/तेहरान: मध्य-पूर्व (Middle East) में लंबे समय से जारी तनाव और युद्ध की स्थिति के बीच एक बेहद चौंकाने वाली और राहत भरी खबर सामने आ रही है। प्रतिष्ठित सऊदी मीडिया आउटलेट 'अल-अरबिया' ने दावा किया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका (US) और ईरान आगामी शुक्रवार को एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं। इस संभावित समझौते के 14 सूत्रीय मसौदे की मुख्य बातें लीक हो गई हैं, जो इस प्रकार हैं:
1. सभी मोर्चों पर तत्काल युद्धविराम
समझौते पर हस्ताक्षर होते ही अमेरिका, ईरान और उनके सभी सहयोगी देश लेबनान सहित सभी मोर्चों पर तत्काल और स्थायी रूप से युद्ध समाप्त करने की घोषणा करेंगे। दोनों देश भविष्य में एक-दूसरे के खिलाफ बल प्रयोग या धमकी न देने की प्रतिबद्धता जताएंगे।
2. प्रतिबंधों से मुक्ति और ब्लॉक हटाना
अमेरिका तुरंत ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) को हटा देगा ताकि फारस की खाड़ी से ओमान की खाड़ी के बीच व्यापारिक जहाजों की आवाजाही 30 दिनों के भीतर युद्ध-पूर्व की स्थिति में लौट सके। इसके बदले ईरान समुद्री रास्तों से बारूदी सुरंगों (Mines) को निष्क्रिय करेगा। साथ ही, अमेरिका ईरान पर लगे सभी प्राथमिक और माध्यमिक प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का वादा करेगा।
3. $300 बिलियन का भारी-भरकम आर्थिक पैकेज
लीक हुए मसौदे के मुताबिक, अमेरिका अपने क्षेत्रीय भागीदारों के साथ मिलकर ईरान के आर्थिक विकास और पुनर्वास के लिए एक व्यापक योजना तैयार करेगा। इसके तहत ईरान को कम से कम $300 बिलियन डॉलर (करीब 300 अरब डॉलर) की फंडिंग सुनिश्चित की जाएगी।
4. न्यूक्लियर प्रोग्राम पर यथास्थिति और तेल निर्यात को छूट
ईरान ने एक बार फिर दोहराया है कि वह कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। अंतिम समझौते तक दोनों देश परमाणु कार्यक्रम पर यथास्थिति बनाए रखेंगे। इस दौरान अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ईरान को कच्चे तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों के निर्यात और बैंकिंग-इंश्योरेंस सेवाओं के लिए विशेष छूट (Waivers) जारी करेगा। साथ ही विदेशों में फ्रीज की गई ईरान की संपत्तियों को भी पूरी तरह बहाल किया जाएगा।
5. 60 दिनों का समय और UNSC की मुहर
दोनों पक्ष इस MoU के आधार पर अधिकतम 60 दिनों के भीतर एक अंतिम और स्थायी समझौते पर पहुंचने के लिए बातचीत करेंगे। इस अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के एक बाध्यकारी प्रस्ताव के माध्यम से मंजूरी दी जाएगी, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय वैधता सुनिश्चित हो सके।










