18वें एशियाई खेलों का कल रंगारंग समापन हो गया और भारत के लिए यह खेल इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों के साथ दर्ज हो गए हैं। भारतीय एथलीटों ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कुल 69 पदक जीते, जिसमें 15 स्वर्ण, 24 रजत और 30 कांस्य पदक शामिल हैं। यह 1951 के बाद से एशियाई खेलों के इतिहास में भारत का अब तक का सबसे बड़ा पदक संग्रह है।
एथलेटिक्स में पदकों की बौछार भारत की इस सफलता की नींव एथलेटिक्स ट्रैक पर रखी गई, जहाँ भारतीय धावकों और थ्रोअर्स ने कुल 19 पदक (7 स्वर्ण सहित) झटके। हरियाणा के नीरज चोपड़ा ने भाला फेंक (Javelin Throw) में स्वर्ण जीतकर नया कीर्तिमान स्थापित किया, वहीं हिमा दास ने अपनी रफ्तार से देश का दिल जीत लिया।युवा शक्ति और नए खेलों में सफलता इन खेलों की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि शूटिंग, कुश्ती और मुक्केबाजी जैसे पारंपरिक खेलों के साथ-साथ ब्रिज (Bridge) जैसे नए खेलों में भी भारत ने स्वर्ण पदक हासिल किया। 16 वर्षीय सौरभ चौधरी ने निशानेबाजी में स्वर्ण जीतकर साबित कर दिया कि भारतीय युवाओं का भविष्य उज्ज्वल है। हालांकि, कबड्डी और हॉकी में मिली कुछ हार ने प्रशंसकों को थोड़ा निराश किया, लेकिन समग्र पदक तालिका ने पूरे देश को जश्न मनाने का मौका दे दिया।
प्रधानमंत्री ने थपथपाई पीठ पदक तालिका में भारत 8वें स्थान पर रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा, "69 पदक जीतना हर भारतीय के लिए गर्व की बात है। हमारे खिलाड़ियों ने न केवल रिकॉर्ड तोड़े हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा की एक नई गाथा भी लिखी है।"कल शाम हुए समापन समारोह में रानी रामपाल ने तिरंगा थामकर भारतीय दल का नेतृत्व किया। अब भारतीय एथलीटों का अगला लक्ष्य 2020 के टोक्यो ओलंपिक पर होगा।









